Accounting

Accounting क्या है? What is Accounting पूरी जानकारी हिन्दी मे जाने

Written by Rishabh Shukla

Accounting को हिंदी भाषा मे लेखांकन कहा जाता है। ये एक  process होता है जो की Financial Aspects (वित्तीय पहलुओ) को record रखता है। Accounting का process किसी भी organization या business में हो रहे financial transactions के बारे में लिखित रूप में जानकारी रखता है। ये पैसों के लेन देन को रिकॉर्ड करता है, साथ ही साथ वर्गीकृत या निक्लासिफ़ाइकरतेहै, और उनके सारांश तैयार करके उनको इस प्रकार प्रस्तुत करते है, जिससे उनका विश्लेषण या निर्वचन हो सके।

Accounting क्या है? What is Accounting??

Accounting एक विशेष प्रमुख रूप से संबंधित सभी लेन देन को Record करता है । Account या खाता किसी भी व्यक्ति या चीज़ से संबंधित लेन देन के सारांश रिकॉर्ड को दर्शाता है।

उदाहरण स्वरूप:- जब कोई एंटिटी अलग अलग suppliers और consumers के साथ लेन देन करती है, तो प्रत्येक suppliers और consumers एक अलग खाता होगा। खाता tangible तथा intangible किसी भी चीजों से संबंधित हो सकता है जैसे की – ज़मीन, बिल्डिंग्स, फर्नीचर, etc.

CHARACTERISTICS OF ACCOUNTS

  • IDENTIFY THE TRANSACTION
  • MEASURING THE TRANSACTION
  • RECORDING IN ACCOUNT BOOK
  • SUMRISE
  • ANALYSIS

BASIC ACCOUNTING TERMS

BUSINESS- A business is an organization where people work together. In business, people work to make and sell products or services. Other people buy products and services. The business owner is the person who hires people for work. A business can earn a profit for the products and services it offers. The word business comes from the word busy and means doing things. It works on a regular basis.

CAPITAL- उस धनराशि को पूँजी कहा जाता है जिसे व्यवसाय का स्वामी व्यवसाय में लगाता है।इसी राशि से व्यवसाय प्रारम्भ किया जाता है।

पूँजी को दो निम्नलिखित भागों में विभाजित किया जाता है :-

  1. स्थिरपूँजी :- सम्पत्तियों को प्राप्त करने के लिए जो धनराशि लगाई जाती है, वह स्थित पूँजी कहलाती है, जैसे – मशीनरी तथा संयंत्र का क्रय, भूमि तथा भवन का क्रय।
  2. कार्यशीलपूँजी :- पूँजी का वह भाग जो व्यवसाय के दैनिक कार्यों के लिए इस्तेमाल होता है, कार्यशील पूँजी कहलाता है।

ASSETS- Assets वैसे goods और services होते हैं जिन्हें भविष्य में रुपयों में मापा जा सकताहै| Assets वैसे resource होते हैं जो की किसी भी business में profit यानि की लाभ generate करने में सहायता करते हैं| Assets आपके वैसे समान होते हैं जो की भविष्य में आपको benefit प्रदान करते है या सिंपल शब्दों में कहें तो assets आपके पैकेट में पैसे रखता है| Example: Cash, Investment, Land, Building etc.

हम कह सकते हैं कि सम्पत्तियाँ वे स्त्रोत्र हैं जो भविष्य में लाभ पहुँचाते हैं। उदाहरणकेलिए, मशीन, भूमि, भवन, ट्रक, आदि।

इस तरह सम्पत्तियाँ व्यवसाय के मूलयवान साधन हैं जिन पर व्यवसाय का स्वामित्व है तथा जिन्हें मुद्रा में मापी जाने वाली लागत पर प्राप्त किया गया है।

सम्पत्तियों के निम्नलिखित प्रकार है :-

  • स्थायी सम्पत्तियाँ (Fixed Assets)

स्थायी सम्पत्तियों से आशय उन सम्पत्तियों से है जो व्यवसाय में दीर्घकालत कर खीजाने वाली होती हैं और जो पुनःविक्रय के लिए नहीं हैं।

उदाहरण – भूमि, भवन, मशीन, उपस्करआदि।

  • चालु सम्पत्तियाँ (Current Assets)

चालु सम्पत्तियाँ से आशय उन सम्पत्तियों से है जो व्यवसाय में पुनःविक्रय के लिए या अल्पावधि में रोकड़ में परिवर्तित करने के लिए रखी जाती हैं।इसलिए इन्हें चालू सम्पत्तियाँ, चक्रीय सम्पत्तियाँ और परिवर्तनशील सम्पत्तियाँ भी कहा जाता है।

उदाहरण : देनदार, पूर्वदत्तव्यय, स्टॉक, प्राप्यबिल, आदि।

LIABILITY-Liabilities का हिंदी meaning दायित्व, कर्जा या ऋण होता है| जो पैसा आपको किसी दुसरे पार्टी को देना होता है तो उसे liabilities कहा जाता है| किसीभी company के द्वारा किसी अन्य company या organization को दिया जाने वाला राशी या मूल्य Liabilities कहलाताहै| Liabilities का मतलब होता है अपने पॉकेट से पैसा को किसी दुसरे के पॉकेट में या account में send करना|

साधारण शब्दों में समझे तो किसी एक company के द्वारा दुसरे company को दिए जाने वाले सम्पति Liabilities कहलाताहै| Liabilities दो प्रकार के होते हैं:

  • Non-current Liabilities
  • Current Liabilities

Non-current Liabilities

Non-Current Liabilities वैसे liabilities होते हैं जिसे हमें एक financial year या उससे अधिक समयों के बाद चुकाना होता है मतलब की वैसा liabilities जिसे हमें लम्बे समय के बाद चुकाना होता है इसीलिए इसे Long term liabilities भी कहा जाता है|

चलिए example से समझतेहैं जैसे अभी आपने अपना दुकान open करने के लिए या फिर किसी भी project plan के लिए से एक बैंकसे loan लिया लेकिन आपको loan चुकाने के लिए लम्बे समय की अवधि दी जाती हैतो इसे long term liabilities कहा जाता है| मतलब की आपको loan चुकाने के लिए एक financial year से ज्यादा समय दिया जाता है तो use Non-current liabilities या long term liabilities कहा जाता है|

Example: Long term loan

Current liabilities

Current Liabilities वैसे liabilities को कहा जाता है जिसे हमें एक सिमित समयों में या निकी short time में चुकाना पड़ता हैइसलिए इसे short term liabilities भी कहा जाता है|

सरल शब्दों में कहें तो वैसा ऋण जो हमें एक financial year या उससे भी कम अवधि में चुकाना पड़ता है उसे Current liabilities या फिर short term liabilities कहाजाताहै| Current liabilities के example:

  • Electricity बिल जो की हमें प्रत्येक महीने चुकाने पड़ते हैं|
  • School fees
  • Payments to Employee
  • Tax paying

Current liabilities निम्नप्रकारकेहोसकतेहैं:

  • Account payable
  • Short term loan
  • Bank overdraft

GOODS- जिनवस्तुओंकाकोईव्यापारीव्यापरकरताहै, वहउसकामाल (Goods) कहलाताहै, जैसे – यदि कोई व्यापारी गेहूँ का व्यापर करता है तो गेहूँ उसका माल कहलाएगा।

यदि फर्नीचर का व्यापार करता है तो फर्नीचर उसका माल कहलाएगा। तो हम इसे ऐसे भी कह सकते है कि जब किसी वस्तु का निर्माण या क्रय, बिक्री करने के उद्देश्य से होता है तो वह माल कही जाती है।

REVENUE- REVENUE से आशय व्यवसाय की आय से है।इसका अभिप्राय नियमित रूप से प्राप्त होने वाली आय या आवर्ती प्रकृति की आय से भी है।आगम से पूँजी में अभिवृद्धि होती है।

REVENUE का उदाहरण

मालकेविक्रयसेप्राप्तियाँ, अर्जितब्याज, अर्जितकमीशन, अर्जितकिराया, अर्जितलाभांश, अर्जितबट्टा, आदि।

EXPENSE- REVENUE की प्राप्ति के लिए प्रयोग की गई वस्तुओं एवं सेवाओं की लागत को व्यय कहते हैं।

व्यय के उदाहरण :-

विज्ञापनव्यय, कमीशन, ह्रास, किराया, वेतन, आदि।

CREDITOR -जिस व्यक्ति, संस्था, फर्म, कम्पनीयानिगम, आदि को उधार क्रय के लिए या ऋण के लिए व्यापारी द्वारा धन देय होता है, वे व्यापारी के लेनदार कहे जाते हैं।

DEBTOR- वे व्यक्ति, संस्था, फर्म, कम्पनी या निगम, आदि जिनसे धन वसूलना रहता है अथवा जिनके पास संस्था की राशि देयहै, उन्हें देनदार (Debtor) कहा जाता है।

DRAWING- जब हम अपने व्यक्तिगत खर्चों के लिए बिज़नेस से पैसा निकालेंगे तो उसे हम ड्राइंग कहेंगे।

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About the author

Rishabh Shukla

मेरा नाम Rishabh Shukla है और मैं एक Professional Certified Management Accountant हु, इस ब्लॉग पर आपको Tally ERP 9, MS Excel और SAP की Practical Knowledge मिलेगी. Thanks Guys

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